Shri Sankatmochan Hanumanastak: श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक
।। मत्तगयन्द छन्द ।। बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों । ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो । देवनऔर पढ़ें
और पढ़ेंRudra Suktam- शिव को प्रसन्न करने के लिए अवश्य करें पाठ
Rudra Suktam: रुद्र सूक्तम् वेदों में वर्णित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जो भगवान रुद्र (शिव) की स्तुति करता है। यह मुख्य रूप से ऋग्वेद और यजुर्वेद में पाया जाता हैऔर पढ़ें
और पढ़ेंMadhurashtakam- मधुराष्टकम्
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥१॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं । चलितं मधुरं भ्रमितंऔर पढ़ें
और पढ़ेंShree Shiv Shankratshtkam: श्री शिवशंकराष्टकम्
श्री शिवशंकराष्टकम् रुद्राय लोकसुखदाय जटाधिपाय भाले त्रिपुण्ड्रलसिताय महेश्वराय। गङ्गाधराय गिरिशाय दिगम्बराय तस्मै नमो भगवते शिवशंकराय ।। भूतेश्वराय गिरिजापतये हराय श्रीशम्भवे बलवते महते मृडाय । लङ्केशरावणनिशाचरवन्दिताय तस्मै नमो भगवते शिवशंकराय ।।और पढ़ें
और पढ़ेंShiva Dhyan Mantra: शिव ध्यान मंत्र
ध्याये नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचंद्रां वतंसं। रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।। पद्मासीनं समंतात् स्तुततममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं। विश्वाद्यं विश्वबद्यं निखिलभय हरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।
और पढ़ेंSri Shivashtakam Lyrics: श्री शिवाष्टकम्
प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथ नाथं सदानन्द भाजाम्। भवद्भव्य भूतेश्वरं भूतनाथं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे॥1॥ गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं महाकाल कालं गणेशादि पालम्। जटाजूट गङ्गोत्तरङ्गै र्विशालं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे॥2॥और पढ़ें
और पढ़ेंGanesha Pancharatnam: गणेश पंचरत्नम्
मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् कलाधरावतंसकं विलासलोक रक्षकम्। अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम्॥1॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्धरम्। सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं महेश्वरंऔर पढ़ें
और पढ़ेंAnnapurna Stotram: अन्नपूर्णा स्तोत्रम्, नित्य पाठ करने से नहीं होगी धन्य धान्य की कमी
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी । प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१॥ नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी । काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥२॥ योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।और पढ़ें
और पढ़ेंAshtalakshmi Stotram: अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्
॥ आदिलक्ष्मि ॥ सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि,चन्द्र सहोदरि हेममये मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायनि,मञ्जुळभाषिणि वेदनुते। पङ्कजवासिनि देवसुपूजित,सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते जय जय हे मधुसूदन कामिनि,आदिलक्ष्मि सदा पालय माम्॥1॥ ॥ धान्यलक्ष्मि ॥ अहिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि,वैदिकरूपिणिऔर पढ़ें
और पढ़ेंDvadasa Jyotirlinga Stotram: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रिशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोमकारममलेश्वरम्॥ परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारूकावने॥ वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमी तटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥ एतानिऔर पढ़ें
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