Brahma Ji Temple: किसने दिया था सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को श्राप, क्यों हैं गिनती के मंदिर!

Brahma Ji Temple  हिंदू धर्म में ब्रह्मा, विष्णु और महेश को त्रिदेव कहा जाता है। इनमें ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता, विष्णु जी को पालक और शिव जी को संहारक माना जाता है। जहां भगवान विष्णु और भगवान शिव के हजारों मंदिर और भक्तों द्वारा नियमित रूप से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है, वहीं ब्रह्मा जी के मंदिर बहुत कम देखने को मिलते हैं और उनकी पूजा भी प्रचलित नहीं है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण हैं और किन पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी की पूजा निषिद्ध मानी जाती है।

ब्रह्मा जी की पूजा न होने के प्रमुख कारण (Brahma Ji Temple)

 श्राप का प्रभाव

पुराणों में ब्रह्मा जी की पूजा न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण भगवान शिव का दिया हुआ श्राप माना जाता है। कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच यह विवाद हुआ कि दोनों में से कौन बड़ा है। तभी वहां एक विशाल ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ, जिसका आदि और अंत खोजना उनके लिए चुनौती बन गया।विष्णु जी वराह रूप में पाताल गए और ब्रह्मा जी हंस रूप में ऊपर आकाश की ओर उड़ गए।

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विष्णु जी को कोई अंत नहीं मिला, लेकिन ब्रह्मा जी ने केतकी के फूल से झूठी गवाही दिलाकर यह दावा कर दिया कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का आदि खोज लिया है। इस छल को देखकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि उनकी पृथ्वी पर कोई पूजा नहीं करेगा।
यही कारण है कि ब्रह्मा जी की पूजा आम रूप से नहीं की जाती।

ब्रह्मा जी का कार्य पूरा हो जाना

ब्रह्मा जी का कार्य केवल सृष्टि की रचना करना था। उन्होंने सृष्टि उत्पन्न कर दी, अब उसका पालन और संहार विष्णु और शिव जी के कार्यक्षेत्र में आता है। भक्त प्रायः उन देवताओं की पूजा करते हैं, जो जीवन में सीधा प्रभाव डालते हैं, जैसे कि पालन करने वाले विष्णु जी और संकट हरने वाले शिव जी। चूंकि ब्रह्मा जी अब किसी प्रकार से प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं डालते, इसलिए उनकी पूजा का प्रचलन धीरे-धीरे कम हो गया।

 ब्रह्मा जी का विवाह और सावित्री का शाप (Brahma Ji Temple)

एक अन्य कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी जब पुष्कर (राजस्थान) में यज्ञ कर रहे थे, तब उनकी पत्नी सावित्री (सरस्वती) विलंब से पहुंचीं। यज्ञ में देवी का होना अनिवार्य था, इसलिए उन्होंने जल्दबाजी में गायत्री नामक एक कन्या से विवाह कर लिया। जब सावित्री वहां पहुंचीं और यह देखा, तो उन्होंने क्रोधित होकर ब्रह्मा जी को शाप दिया कि उनकी पूजा धरती पर नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पुष्कर में उनका एक मंदिर स्थापित किया जाएगा और वहीं उनकी पूजा होगी। यही कारण है कि पुष्कर, राजस्थान में ब्रह्मा जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो दुनिया में गिने-चुने ब्रह्मा मंदिरों में से एक है।

 भक्ति मार्ग में ब्रह्मा जी की भूमिका नगण्य

हिंदू धर्म में भक्ति मार्ग में पालनहार और संकटमोचक देवताओं की अधिक पूजा की जाती है। भक्त विष्णु जी से मोक्ष की प्रार्थना करते हैं और शिव जी से सांसारिक दुखों से मुक्ति की। विष्णु जी भक्तों को मुक्ति और सुख देते हैं। शिव जी सभी कष्ट हर लेते हैं। ब्रह्मा जी केवल सृष्टि के रचनाकार हैं, लेकिन वे न तो संकट हरते हैं और न ही भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं। इस कारण से भी उनकी पूजा का विशेष प्रचलन नहीं हुआ।

ब्रह्मा जी के मंदिर कहाँ हैं?

हालांकि ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती, लेकिन फिर भी कुछ मंदिर उनके लिए समर्पित हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं—

पुष्कर ब्रह्मा मंदिर (राजस्थान) – यह दुनिया का सबसे प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर है।

ब्रह्मा मंदिर (थिरुप्पूवनम, तमिलनाडु)

कार्तिकेय ब्रह्मा मंदिर (उत्तराखंड)

ब्रह्मा मंदिर (कर्नाटक)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए ज्योतिष सागर उत्तरदायी नहीं है।

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